सूरज की पहली किरण के निकलने की खबर देने और शाम को अंधियारे की दस्तक के साथ इंसानों के बीच बेखौफ फुदकने वाली गौरेया धीरे- धीरे विलुप्त हो रही है। लेकिन फरीदाबाद के एक शख्स हैं, जो इसे बचाने और फिर से वही चहचहाहट जीवंत करने को जी जान से जुटे हुए हैं। इनका नाम है भवान सिंह दस साल से ये खुद गौरेया के लिए घर बनाते हैं। बिना किसी शुल्क के इन्हें दूसरों के घर में लगाते हैं।

